Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Laghukatha Bado ki dant bhi ashirvad by kishan bhavnani gondiya

लघुकथाबड़ो की डांट भी आशीर्वाद रोज की दिनचर्या की मुताबिक़ दादाजी बेसब्री से अखबार वाले का इंतजार कर रहे थे।उन्हें …


लघुकथा
बड़ो की डांट भी आशीर्वाद

Laghukatha Bado ki dant bhi ashirvad by kishan bhavnani gondiya

रोज की दिनचर्या की मुताबिक़ दादाजी बेसब्री से अखबार वाले का इंतजार कर रहे थे।उन्हें सुबह सुबह जैसे अखबार की लत लगी हुई थी।दादी मां उनकी इस आदत से परेशान भी थी रोज की तरह बस तब तक चिड चिड करना और अखबार वाले को देर से आने पर दादाजी का फटकारना जैसे आदत ही बन गई थी।पर अखबार वाला भी कहां सुनने को तैयार था, वो रोज ही देर से आता दादाजी की डांट सुनता और दादाजी को प्रणाम कर मुस्कुराके चला जाता।पर मैं रोज ये देख हैरान होता थी कि अखबार वाला डांट सुन के भी रोज मुस्कुराता और दादाजी के पाव छू कर चला जाता।एक दिन उत्सुकता वश मैंने अखबार वाले से कारण पूछ ही लिया।अखबार वाला बोला जब से आपके घर अखबार देना शुरू किया है उस दिन से मेरे बच्चे की जैसे सफलता की सीढ़ी खुल गई। दादाजी की डांट मेरे लिये और मेरे परिवार के लिये जैसे आर्शीवाद बनके रोज मेरे घर मे खुशियां लाती है।।बस यही कारण है की मैं मुस्कुरा के पांव छू कर प्रणाम कर चला जाता हूं।मुझे दादाजी की डांट का बुरा नहीं लगता बल्कि ऐसा लगता है कि आशिर्वाद दे रहे हैं और फ़ूल बरसा रहे हैैं यह सुन मैं भाउक हो गया और एक अमूल्य गुण उठाया और पेपर वाले को सैल्यूट किया

लघुकथा से सीख ये मिलती है हमें… कि बड़ो की डांट भी आर्शीवाद समझ जो बहस न करे वो सफलता पाता है और चारों धामों का सुख बड़े बुजुर्गों के चरण शरण में ही हैं

लेखक कर विशेषज्ञ,साहित्यकार, कानूनी लेखक,चिंतक,कवि, एडवोकेट  किशन सनमुखदास भावनानी

गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

व्यंग्य कविता-क्योंकि मैं शासन का जँवाई राजा हूं| kyuki Mai shashan ka jawai raja hun

December 10, 2022

यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय कर्मचारियों का शासन पद चेयर में अभूतपूर्व सम्मान हरे गुलाबी की बारिश जनता पर ठस्का समाज

हिम्मत ना हारो | Himmat na haro

December 2, 2022

हिम्मत ना हारो | Himmat na haro मत कहो तुमसे तय जिंदगी का सफ़र ना होगा,मैं बताता हूं कैसे डूबकर

प्रेम प्रसंग | Prem prasang | kavita

December 1, 2022

प्रेम प्रसंग प्रेम प्रसंग | Prem prasang | kavita एक छोटा सा शब्द हॉं! फिर बिखरी हुई जिंदगी।मंदिर मस्जिद दुआ

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita

December 1, 2022

मैं मुस्कुराना सीखी हूं| mai muskurana seekhi hun| kavita मैं मुस्कुराना सीखी हूं दर्द को छुपा कर गम को दफनाकर

Samvidhan divas par kavita

November 25, 2022

कविता-भारत संविधान दिवस 26 नवंबर को मना रहा है हर भारतीय नागरिक के लिए 26 नवंबर का दिन खास है

Maa| माँ | maa par kavita

November 25, 2022

माँ |Maa Maa par kavita  माँ ममता की खान है,माँ दूजा भगवान है ।माँ की महिमा अपरंपार,माँ श्रेष्ठ-महान है ।।

PreviousNext

Leave a Comment