Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
LaghuKatha Adla badli

LaghuKatha Adla badli

लघुकथा अदला-बदली सरिता जब भी श्रेया को देखती, उसके ईर्ष्या भरे मन में सवाल उठता, एक इसका नसीब है और …


लघुकथा अदला-बदली

सरिता जब भी श्रेया को देखती, उसके ईर्ष्या भरे मन में सवाल उठता, एक इसका नसीब है और एक उसका। क्या उसका नसीब उसे नहीं मिल सकता?
सरिता के छोटे से फ्लैट की बालकनी से श्रेया का भव्य बंगला बहुत सुंदर दिखाई देता था। वह जब भी पति के साथ मोटरसाइकिल से निकलती, श्रेया के बंगले की पार्किंग एरिया में खड़ी बीएमडब्ल्यू पर नजर उसकी नजरें चिपक जातीं।
अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए श्रेया खुले हाथों से पैसे खर्च करती थी। ट्रिम किए बाल, नियमित फेशियल, पेडिक्योर, मेनिक्योर, सब कुछ संपूर्ण। सिर से ले कर पैरों तक सब कुछ व्यवस्थित और सुंदर। जबकि सरिता के मर्यादित बजट में यह सब कहां से हो पाता। उसके बिखरे बाल, उसमें बीच-बीच में सफेद बाल। वह मेहंदी तो लगाती थी, पर कभी समय न मिलता तो काले बालों के बीच सफेद बाल झांकने में बिलकुल पीछे नहीं रहते थे। साग-सब्जी काटते-काटते हाथों की अंगुलियो की चमड़ी खुरदुरी हो गई थी। खुद बर्तन मांजने से नाखूनों का रंग और आकार अजीब हो गया था। अगर श्रेया के यहां की तरह उसके यहां भी नौकरों की फौज होती तो उसका भी सिर से ले कर पैरों तक अलग ही नक्शा होता। पर उसके भाग्य में तो कुछ और ही था।
कहां श्रेया के डिजाइनर कपड़े और कहां उसके साधारण कपड़े, इस्त्री किए कपड़े पहनने का आनंद ही कुछ और होता है, घंटो इस्त्री पकड़ने वाले सरिता के हाथ उससे कहते। रविवार को किसी ठेलिया पर चाट-पकौड़ी या समोसे-कचौड़ी खा कर लौटते हुए सरिता यही सोचते हुए अपार्टमेंट की सीढ़ियां चढ़ रही होती कि बीएमडब्ल्यू में फाइवस्टार होटल की लज्जत ही कुछ और होती है।
श्रेया का शरीर हमेशा सोने और हीरों के गहनों से सजा होता था। समय समय पर वे बदलते रहते थे। जैसे कपड़े, वैसे आभूषण। जबकि सरिता को विवाह के समय जो मंगलसूत्र मिला था, वही एक महत्वपूर्ण गहना था। सोना खरीदने की औकात नहीं थी, इसलिए चांदी पर सोना चढ़वा कर दिल को संतोष मिल जाता था।
पर श्रेया को देख कर सरिता के दिल का संतोष लुप्त हो जाता और मन ईश्वर से एक ही सवाल पूछता, ‘श्रेया का भाग्य उसे नहीं मिल सकता क्या?’
और अगर मिल जाए तो… तमाम मेघधनुषी सपने आंखों में तैरने लगते। शाम को जब पड़ोस में रहने वाली हिमांशी ने बताया कि सामने वाले बंगले में रहने वाली श्रेया को ब्लड कैंसर है और लास्ट स्टेज में है। तब से सरिता भगवान से यही प्रार्थना कर रही है कि उसके भाग्य में जो है, वही ठीक है। प्लीज अदला-बदली मत कीजिएगा।.

About author

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)


Related Posts

लघुकथा:प्रेम | laghukatha -Prem

May 14, 2023

 लघुकथा:प्रेम पिछले एक घंटे से डा.श्वेता ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर विविध रंगों की शर्ट पसंद कर रही थीं। एक प्रखर

आखिरी खत : खन्ना के स्टारडम का पहला पत्र

May 14, 2023

सुपरहिट:आखिरी खत : खन्ना के स्टारडम का पहला पत्र राजेश खन्ना की फिल्मों की बात की जाती है तो सामान्य

व्यंग्य–मैच देखने का महासुख

May 7, 2023

व्यंग्य–मैच देखने का महासुख युधिष्ठिर मोक्ष प्राप्त करने हिमालय पर जा रहे थे, तब यक्ष ने उनसे पांच सवाल पूछे

सुपरहिट l-प्यार की ‘बदिनी’

May 4, 2023

सुपरहिट-प्यार की ‘बदिनी’ : मैं बंदिनी पिया की, मैं संगिनी हूं साजन की नूतन ने 1995 के अपने एक इंटरव्यू

आलम आरा : पहली बोलती फिल्म की खो गई आवाज

May 4, 2023

 आलम आरा : पहली बोलती फिल्म की खो गई आवाज भारत की सांस्कृतिक परंपरा में इतिहास को संभाल कर रखने

लघुकथा-अनोखा मिलन | laghukatha -Anokha milan

April 26, 2023

लघुकथा-अनोखा मिलन बेटी के एडमिशन के लिए स्कूल आई मधुलिका एक बड़े से हाॅल में पड़ी कुर्सियों में एक किनारे

PreviousNext

Leave a Comment