Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kya kahnege bhala us bhaichare ko by ajay prasad

 क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को  क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को रोक न पायी  जो मुल्क के …


 क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को

kya kahnege bhala us bhaichare ko by ajay prasad

 क्या कहेंगे भला हम उस भाईचारे को

रोक न पायी  जो मुल्क के बँटवारे को ।

गुनाहगार थे कौन औ सज़ा मीली किसे

तरस गए अपने ही अपनों  के सहारे को ।

किसी को सत्ता तो किसी को मिला भत्ता

बेबसोमजलूम तो भटकते  रहे गुजारे को।

जो थे खुशनसिब वो रह गए महफ़ूज़ मगर 

भूले नहीं उस दौर के खौफ़नाक नज़ारे को।

-अजय प्रसाद 


Related Posts

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी

April 30, 2022

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी हर प्रशासकीय पद की ज़वाबदेही व्यवहारिक रूप से ज़रूरी है कागजों में दर्ज ज़वाबदेही को

प्रेम की महक आ गई-कविता

April 30, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात प्रेम की महक आ गई महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई, साथ था

जीवन तथ्य!

April 27, 2022

जीवन तथ्य! बिखरने के बाद भीनिखरना एक अदा है,बिछड़ने के बाद भी,हम स्वयं के सदा हैं! खुशी हो या गम,जीना

वाह क्या किस्मत पाई है!

April 27, 2022

 वाह क्या किस्मत पाई है! रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत ,  जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम

कविता आज़ाद

April 27, 2022

 आजाद! आजाद विचार, आजाद ख्याल, आजादी से जी ले हर एक साल, आजाद सी दुनिया, आजाद सी ढाल, आजाद हो

पीछे छूटा! -कविता

April 27, 2022

पीछे छूटा! -कविता मुड़ कर ना देखो, जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने का क्या पछतावा,सब

PreviousNext

Leave a Comment