Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kitne dukhi honge wo by Jitendra Kabir

 कितने दुखी होंगे वो तुम दुखी हो कि इन सर्दियों में महंगी ब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए, जिन्हें मयस्सर नहीं …


 कितने दुखी होंगे वो

Kitne dukhi honge wo by Jitendra Kabir

तुम दुखी हो

कि इन सर्दियों में महंगी

ब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,

जिन्हें मयस्सर नहीं

कड़कती सर्दी में शरीर पर

एक अदद कपड़ा,

कभी सोचा है 

कितने दुखी होंगे वो?

तुम दुखी हो

कि वजन कम नहीं हो रहा

महंगे तरीके अपनाकर भी,

जिन्हें मयस्सर नहीं

खाने को दो जून की रोटी,

कभी सोचा है

कितने दुखी होंगे वो?

तुम दुखी हो

कि महंगी गाड़ियां नहीं हैं

तुम्हारे पास अभी,

जिन्हें मयस्सर नहीं

चलने के लिए पांव में

चप्पल भी,

कभी सोचा है

कितने दुखी होंगे वो?

तुम दुखी हो

कि काम के चलते 

वक्त नहीं मिलता तुम्हें

जिंदगी का आनंद लेने का,

जिन्हें मयस्सर नहीं

भरोसा अगले पल का 

कि अब जैसे गोलीबारी

बमबारी हो जाए,

कभी सोचा है

कितने दुखी होंगे वो?

           जितेन्द्र ‘ कबीर ‘

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

सही मात्रा

September 28, 2022

सही मात्रा मर जातें हैं बूंद भरमेंजी लेते हैं पी हलाहललंबी उम्र जी जाते हैंसुन तानों का जहरजहर तेरी फितरत

अदृश्य प्रलय

September 27, 2022

अदृश्य प्रलय चल रहा एक अदृश्य प्रलयजो न जग को दृष्टिमान होता,सब सजग मधु रागिनी मेंसुप्त होता लुप्त होता।तड़ित ने

हौसलों की उड़ान। (Poem)

September 27, 2022

हौसलों की उड़ान। चलो भरे हौसले की उड़ान,पार करें हर इम्तिहान,खुद से वादा करकेकरें स्वयं की बात का सम्मान। हमारा

जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी

September 26, 2022

              कविता(poem) जज़्बा जांबाज़ी भी पूंजी है हमारी वित्तीय हालत ख़राब है तो क्या हुआ

पापा मैं बोझ नहीं

September 24, 2022

विश्व बालिका दिवस पर विशेष 💓 पापा मैं बोझ नहीं 💓 मम्मी – पापा मैं बेटी हूँ आपकीपर , क्या

पिता के लिए कोई शब्द नहीं

September 22, 2022

कविता पिता के लिए कोई शब्द नहीं पिता की ज्ञानवर्धक बातों को अनुशासन से समझते नहींपिता के लिए कोई शब्द

PreviousNext

Leave a Comment