Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kisan kavita by Indu kumari bihar

 शीर्षक- किसान युगों से आज तक मरते आए हैं किसान जान रहे सारे जहान कड़ी मेहनत के बल पर मिट्टी …


 शीर्षक- किसान

Kisan kavita by Indu kumari bihar

युगों से आज तक

मरते आए हैं किसान

जान रहे सारे जहान

कड़ी मेहनत के बल पर

मिट्टी से अन्न उपजाते हैं

उपजाऊ हो या बंजर धरती

फसलें लहलहाते   हैं

चिलचिलाती धुप हो

या हो सर्दी बरसात

मोड़ते नहीं मुख को अपने

करते रहते हरदम काम

फटी धोती चीथड़े गंजी

जर्जर काया नंगे पाँव

एक सपने आँखों में लेकर

करते रहते हरदम काम

पूरी ना होती उनकी आस

जानें कैसे मिटेगी प्यास

लू चले या ओले पड़े

खेतों में वो काम करे

किसान तेरी यही कहानी

दलालों की चलती मनमानी

अगर कहीं बीमार पड़े

खजाने तो खाली पड़े

कर्ज के मकड़जाल में

फंसते चले जाते हैं

फूटी कौड़ी नहीं बचा पाते हैं

पैसों के अभाव में वह

आगे कुछ नहीं कर पाते हैं

        

स्व रचित

          डॉ. इन्दु कुमारी

हिन्दी विभाग

         मधेपुरा बिहार


Related Posts

सत्यनिष्ठा का भाव | satyanishtha ka bhav

April 3, 2023

सत्यनिष्ठा का भाव भारत की संस्कृति व मिट्टी में ही है सत्यनिष्ठा का भाव तभी तो सत्यनिष्ठा से आत्मनिर्भरता अभियान

मां गंगे की पीड़ा की वास्तविक कहानी

April 3, 2023

 मां गंगे की पीड़ा की वास्तविक कहानी गंगा उत्सव मनाने को अब  राष्ट्रव्यापी नदी उत्सव बनाएंगे  मां गंगे की पीड़ा

महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती)| mahavir jayanti

April 3, 2023

महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती) निरख निरख के रूप तुम्हारा “महावीर “दिल भरता ही नहीं, तेरे चरणों से उठकर जाने

ये ख्वाब हमारे संकल्प सामर्थ्य से पूरे होंगे

April 3, 2023

ये ख्वाब हमारे संकल्प सामर्थ्य से पूरे होंगे जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे आजादी के अमृत

महकता है घर जिसमें बच्चे बसते हैं

March 28, 2023

भावनानी के भाव महकता है घर जिसमें बच्चे बसते हैं घर की चौखट चहकती है बच्चे जब हंसते हैं महकता

बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार

March 28, 2023

 भावनानी के भाव बिना आवाज़ की लाठी मारी किया था भ्रष्टाचार धन रहेगा नहीं दुखी करके निकलेगा यह भ्रष्टाचार  बच्चे

PreviousNext

Leave a Comment