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Kisan kavita by Indu kumari bihar

 शीर्षक- किसान युगों से आज तक मरते आए हैं किसान जान रहे सारे जहान कड़ी मेहनत के बल पर मिट्टी …


 शीर्षक- किसान

Kisan kavita by Indu kumari bihar

युगों से आज तक

मरते आए हैं किसान

जान रहे सारे जहान

कड़ी मेहनत के बल पर

मिट्टी से अन्न उपजाते हैं

उपजाऊ हो या बंजर धरती

फसलें लहलहाते   हैं

चिलचिलाती धुप हो

या हो सर्दी बरसात

मोड़ते नहीं मुख को अपने

करते रहते हरदम काम

फटी धोती चीथड़े गंजी

जर्जर काया नंगे पाँव

एक सपने आँखों में लेकर

करते रहते हरदम काम

पूरी ना होती उनकी आस

जानें कैसे मिटेगी प्यास

लू चले या ओले पड़े

खेतों में वो काम करे

किसान तेरी यही कहानी

दलालों की चलती मनमानी

अगर कहीं बीमार पड़े

खजाने तो खाली पड़े

कर्ज के मकड़जाल में

फंसते चले जाते हैं

फूटी कौड़ी नहीं बचा पाते हैं

पैसों के अभाव में वह

आगे कुछ नहीं कर पाते हैं

        

स्व रचित

          डॉ. इन्दु कुमारी

हिन्दी विभाग

         मधेपुरा बिहार


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