Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Khwabo ka jahan by Jitendra kabir

 ख्वाबों का जहां इस जहां से परे न जाने कितने जहां बसते हैं, हर शख्स यहां अपने ख्वाबों का जहां …


 ख्वाबों का जहां

Khwabo ka jahan by Jitendra kabir

इस जहां से परे

न जाने कितने जहां बसते हैं,

हर शख्स यहां

अपने ख्वाबों का जहां लिए फिरता है।

घटती नहीं हैं चीजें जब

इस जहां में उसके हिसाब से

तो ‘ख्वाब-जहां’ में अपनी

दमित इच्छाओं का बहाव लिए फिरता है।

मिले चाहे न मिले उसे

यहां अपने मन का कुछ भी

लेकिन ‘ख्वाब-जहां’ में अपने

कल्पवृक्ष खुद के हजार लिए फिरता है।

मुश्किलें मिलती हैं अक्सर

बहुतायत में यहां हर किसी को

इसलिए ‘ख्वाब-जहां’ में अपनी

सब मुश्किलों का निदान लिए फिरता है।

अपनी नजरों में है हर इंसान

दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण इंसान,

‘ख्वाब-जहां’ में अपनी

वो इसी बात की तस्दीक किए फिरता है।

                                   जितेन्द्र ‘कबीर’

                                   

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment