Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

khwab kavita by anita sharma jhasi

 ख्वाब गहरी नींद में खो गये थे, बंद आँखो ने संजोए ख्वाब। बहुत गहन रात्रि थी तब, घर की चार …


 ख्वाब

khwab kavita by anita sharma jhasi

गहरी नींद में खो गये थे,

बंद आँखो ने संजोए ख्वाब।

बहुत गहन रात्रि थी तब,

घर की चार दिवारों में बंद थी ।

कुछ घुटी-घुटी,कुछ टूटी थी,

हाँ नारी जग से टूटी हुई थी।

आज बहुत कुछ बदल गया,

आज परिन्दें सी पंख है उसके।

सुनहरी किरणें आखों में ,

नये-नये से ख्वाब बुने हैं।

आज आसमान पंख फैलाकर,

नया मुकाम हासिल किया है।

हाँ नारी ने इक ख्वाब गढ़ा है,

अपनी जिंदगी चौखट से पार करी है।

बहुत उलाहने सहती आई है ,

अब तो नव आकाश ख्वाब बना है।

दो दुनिया को वो सजाती ,

घर ऑफिस को साथ निभाती।

थी अबला पर अब सबला है,

शक्ति रूप ने ख़्वाब बुना है।

साकार होंगे नवस्वप्न उसके ,

आज परिन्दें सी पंख फैला उड़ेगी।

ख्वाब देखेगी नारी ,

उसे स्वतंत्रता भी देनी होगी।।

—अनिता शर्मा झाँसी—

—–स्वरचित रचना—-  


Related Posts

समस्त रक्तदान दाताओं

May 25, 2022

समस्त रक्तदान दाताओं देख रही आज मानव सेवा चैन के जरिएएक-एक रक्त की बूंद को तरसे लोगअपनों के जान बचाने

अतीत से परे आगे की ओर बढ़े!

May 25, 2022

अतीत से परे आगे की ओर बढ़े! मुड़ कर ना देखो,जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने

यथार्थ मार्ग!

May 25, 2022

 यथार्थ मार्ग! कुरीतियां और बुरी आदतों को बदलें, इस जिंदगी की राह में थोड़ा और संभले, जितनी हो गई गलतियां

बेबाक हो जाए

May 25, 2022

 बेबाक हो जाए। चुनौतियों का सामना करते हैं, सच्चाई के लिए लड़ते हैं, इंसानियत पर डट कर चलते हैं चलो

चालाक लोमड़ी

May 25, 2022

 चालाक लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके, कर रही थी भोजन की तलाश, दिखे उसे बेल में अंगूर

कुबूल है

May 24, 2022

 “कुबूल है” कुबूल है मुझे तेरी मन मर्ज़ियां कुबूल है चाहत की बौछार कर दूँ तेरी अदाओं पर निसार होते,

PreviousNext

Leave a Comment