Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Khudgarji by Anita Sharma

 विषय-खुदगर्जी  खुदगर्ज कौन नहीं इस संसार में। अपनो का साथ पाने की तमन्ना हर इन्सान में। अपनापन अपना परिवार सर्वोपरि …


 विषय-खुदगर्जी 

Khudgarji by Anita Sharma

खुदगर्ज कौन नहीं इस संसार में।

अपनो का साथ पाने की तमन्ना हर इन्सान में।

अपनापन अपना परिवार सर्वोपरि हर इन्सान को।

इनकी खुशियों की खातिर खुदगर्ज हर इन्सान है।

मतलबपरस्ती में फंसी दुनिया ।

खींचतान कुर्सी की करते नेता ।

हाँ वे भी तो खुदगर्जी है।

भाषणो में भीड़ जुटाते वो भी तो खुदगर्जी है।

रिश्वतखोरी में लिप्त हैं बाबू…..

जल्दी कार्य को बेताबी में जेब गर्म करते।

ये भी तो खुदगर्जी है।

धर्म की अगर बात करें तो-

धर्मगुरु शिष्यो की लाइन बढ़ाता।

नाम भक्तो की संख्या और भीड़।

ये भी तो खुदगर्जी है।

अंधविश्वास में गोल गोल घूमा रहा है-

पैसा सबसे जुटा रहा है।

बाबाओं की खुदगर्जी है।

भक्त चमत्कारिक शक्ति से धन की आस लगाये

ये भी तो खुदगर्जी है।

अकर्मण्यता और खुदगर्जी में डूब रहा संसार है।।

—अनिता शर्मा झाँसी
—मौलिक रचना


Related Posts

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

कोशिश-नंदिनी लहेजा

January 6, 2022

विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और

Leave a Comment