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Khuda bhi aajkal khud me he pareshan hoga

खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा ऊपर से जब कभी …


खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा

Khuda bhi aajkal khud me he pareshan hoga

खुदा भी आजकल खुद में ही परेशान  होगा

ऊपर से जब कभी वो  देखता इन्सान  होगा ।

किस वास्ते  थी बनाई कायनात के साथ हमें

और क्या हम बनकर हैं सोंचकर हैरान होगा ।

किया था मालामाल हमें  दौलत-ए-कुदरत से

सोंचा था कि जीना हमारा बेहद आसान होगा ।

खूबसूरती अता की   थी धरती को बेमिसाल

क्या पता था कि हिफाज़त में  बेईमान होगा ।

दिलो-दिमाग   दिये थे मिलजुलकर रहने को

इल्म न था लड़ने को हिन्दु  मुसलमान होगा ।

खुदा तो खैर  खुदा है लाजिमी है दुखी होना

देख कर हरक़तें हमारी शर्मिन्दा शैतान होगा ।

-अजय प्रसाद


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