kavya shahar chod chale by sudhir srivastav
शहर छोड़ चले तुम्हारे प्यार का सुरूर ऐसा था कि हम तुम्हारे शहर आ गये, तुमसे मिलने की ख्वाहिश तो …
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यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी
February 3, 2022
यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की
नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “
February 3, 2022
नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत
तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “
February 3, 2022
तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –
सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय
February 3, 2022
सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी
ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय
February 3, 2022
ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से ऊँचा हो गया कद लोगों का जमीन सेसुना है जमीनें बंजर पड़ी
मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी
February 3, 2022
मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने
