Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavya shahar chod chale by sudhir srivastav

 शहर छोड़ चले तुम्हारे प्यार का सुरूर ऐसा था कि हम तुम्हारे शहर आ गये, तुमसे मिलने की  ख्वाहिश तो …


 शहर छोड़ चले

kavya shahar chod chale by sudhir srivastav

तुम्हारे प्यार का
सुरूर ऐसा था कि हम
तुम्हारे शहर आ गये,
तुमसे मिलने की 
ख्वाहिश तो बहुत थी मगर
दूर दूर ही रहे।
तुम्हें देखने भर की ख्वाहिशें लिए
यहां वहां, जहां तहां
पागलपन में भटकते रहे।
वर्षों बाद भी 
कभी तुम्हारा दीदार न हुआ,
या फिर शायद तुम्हारा ही
मेरे सामने आना का
कभी दिल ही नहीं हुआ
या फिर तुम्हें 
कभी न ये ख्याल आया
कि कुछ कदम ही सही
हम साथ साथ चलें,
आखिरकार थकहार कर
हम तुम्हारा शहर ही छोड़ चले।
■ सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा, उ.प्र.
    8115285921
©मौलिक, स्वरचित,अप्रकाशित

Related Posts

नारी महिमा

February 24, 2022

नारी महिमा  चाँद की तरह शीतल है नारी।सूर्य की तरह तेजस्वी है नारी।।धरती की तरह धैर्यवान है नारी।सागर की तरह

बेटी

February 24, 2022

बेटी सावन में डाली का झूला है बेटी।उपवन में खिलता गुलाब है बेटी।उगते हुए सूर्य की लाली है बेटी।सन्ध्या में

गृहणी

February 24, 2022

गृहणी बहुत कड़वा है यह अनुभव, सोच और सच्चाई का।दोष किसका है यहां पर, केवल अपने आप का।सब को सुला

छत्रपति शिवजी महाराज

February 24, 2022

छत्रपति शिवजी महाराज छत्रपति शिवजी महाराजझुके नहीं मुगलों के आगे ,शौर्य- साहस के हैं प्रतीक।मराठा साम्राज्य की नींव बने जो,महान

इम्तिहान के पल

February 24, 2022

इम्तिहान के पल! रहना अपने लक्ष्य पर अटल,इरादे नहीं, अपने तरीके बदल,ठहरना ना, तू बस चल,पार कर ले इम्तिहान के

राजस्थानी कविता-मईनुदीन कोहरी “नाचीज बीकानेरी “

February 24, 2022

(राजस्थानी भाषा री मान्यता सारू म्हारी जिद है मान्यता मिळ सकै राजस्थानी अकेडमी रै गठन ताईं एक कविता रोजानां  राजस्थानी

Leave a Comment