Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavya alochak aur prasansahak by jitendra kabir

 आलोचक और प्रशंसक आलोचना का एक पहलू… अक्सर हम अपने आलोचकों से मन ही मन रहते हैं परेशान, मौका ना …


 आलोचक और प्रशंसक

kavya alochak aur prasansahak by jitendra kabir


आलोचना का एक पहलू

अक्सर हम अपने आलोचकों से

मन ही मन रहते हैं परेशान,

मौका ना मिले हमारी बुराई का उनको

रखते हैं इस बात का खास ध्यान,

नजदीक नहीं फटकना चाहते उनके

रखते हैं पूरा स्वाभिमान।

दूसरा पहलू

आलोचक हों अगर आसपास तो

रहते हैं हम ज्यादा सावधान,

उसको गलत साबित करने के लिए

मेहनत करने में लगा देते हैं जान,

बहुत बार हमारी सफलता में उनके

कटाक्षों का भी होता है योगदान।

प्रशंसा का एक पहलू

हममें से बहुत लोग अपने प्रशंसकों से

घिरे रहने को देते हैं अधिमान,

खुश रहते हैं अपने बारे में उनसे सुनकर

प्रतिभायोग्यता के व्याख्यान,

रुपयेपैसे से भी करके मदद उनकी

देते रहते हैं अपनी सदाशयता का प्रमाण।

दूसरा पहलू

घिरे रहें चापलूसों से ही हर समय अगर

तो मन में जाता है बड़ा अभिमान,

अपनी कमियों गलतियों के प्रति 

लगातार कम होता जाता है हमारा ज्ञान,

इस तरह अति आत्मविश्वास के चलते

कर बैठते हैं हम कई बार अपना नुकसान।

                                    जितेन्द्रकबीर

यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।

साहित्यिक नामजितेन्द्रकबीर

संप्रतिअध्यापक

पताजितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश



Related Posts

Dosti kavita by Indu kumari

August 4, 2021

 शीर्षक- दोस्ती खरीदी जा सकती दुनिया की हर चीज पर दोस्ती नहीं भूलायी जा सकती जिन्दगी की हर चीज पर

Agar aisa ho paye kavita by Jitendra Kabir

August 4, 2021

 अगर ऐसा हो पाए छू पाऊं अपने शब्दों से किसी के मन को, तो मेरा लिखना सफल है। जगा पाऊं

Pani kavita by Rajesh shukla madhya pradesh

August 4, 2021

कविता : पानी…. रफ्ता रफ्ता रफ्ता कम हो रहा है पानी कुएं में, बाबड़ी में कावड़ और कावड़ी में नदियों

Mera shringar karo kavita by vinod kumar rajak

August 3, 2021

कविता मेंरा श्रृंगार करो  आज मैं सूनसान सड़क को निहार रहा थापांच मंजिला इमारत के छत पर खड़े हो करइसलिए

Abhi abhi karwan gujrega kavita by vinod kumar rajak

August 3, 2021

अभी -अभी कारवां गुजरेगा अरे! अभी – अभी चौराहे की सड़कें जाम होगी नहीं पता क्यों? कारवां गुज़रेगा सरकार की

Dosti ka rang kavita by Jitendra kabir

August 3, 2021

 दोस्ती का रंग अपनी कमजोरियों पर शर्म, बड़े-बुजुर्गों का लिहाज, समाज में बदनामी के भय और अपने करीबियों के बीच

Leave a Comment