Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita zindagi by deepika biswal

 जिंदगी जिदंगी को अजीब कहा जाए या किस्मत को अजीब कहा जाए? लोगो से एक बात बार – बार सुनी …


 जिंदगी

kavita zindagi by deepika biswal

जिदंगी को अजीब कहा जाए या

किस्मत को अजीब कहा जाए?

लोगो से एक बात बार – बार सुनी कि,

जिदंगी दो पल की है,

उसे खुल कर जियो, 

जिदंगी कीमती है उसे महसूस करो!

अब उन्हे यह बात किस प्रकार समझाए?

ये जिदंगी दो पल की भी होकर ,

एक बोझ -सी लगने लगी है।

कितने लोग आए इस जिदंगी मे,

कुछ खुशियो की बौछार-सी कर गए ,

तो कुछ गम की बारिश-सी कर गए।

ऐ खुदा अब तू ही बता ?

इस जिंदगी को अब जिया कैसे जाए?

और एक दिन जीवन के एक छोर पर फरिश्ता आया ,

जो जीवन की अहमियत समझा गया,

समझा गया वो ये कि कैसे जीया जाए,

जिदंगी है क्या? उसी ने बताया,

हर चीज़ मे खुशियाँ ढूँढना सिखाया,

खुश रहना और खुशिया बाटँना सिखाया,

ये जिंदगी कितनी हसीन है

उसी ने ही बताया,और एक दिन जब बात आई

शुक्रिया अदा करने की, जज़्बात बया करने कि,

तो वो फरिश्ता ही जिंदगी से दूर चला गया।

आज भी एक ही सवाल मन में है कि,

जिदंगी को अजीब कहा जाए या

किस्मत को अजीब कहा जाए?

                दीपिका बिस्वाल

                    दिल्ली


Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

1 thought on “kavita zindagi by deepika biswal”

Leave a Comment