Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita-vo vyakti pita kahlata hai chanchal krishnavanshi

वो व्यक्ति पिता कहलाता है! ख़ुद के सुख को कर न्योछावर बच्चों पर खुशियां लुटाता है बार बार संतान जो …


वो व्यक्ति पिता कहलाता है!

kavita-vo vyakti pita kahlata hai chanchal krishnavanshi


ख़ुद के सुख को कर न्योछावर
बच्चों पर खुशियां लुटाता है
बार बार संतान जो रूठे
सौ बार उसे भी मनाता है
क्या ऐसा कोई व्यक्ति भी है
हो जिसका कोई स्वार्थ नहीं
निः स्वार्थ रहा है जो अबतक
वो व्यक्ति पिता कहलाता है।
लाख मुसीबतें खुद पर आए
संतान को पता न चलने पाए
अनवरत कठिन परिश्रम करता
दुख की घड़ी में भी वो मुस्काए
बेटी के सपनों का राज है वो
पुत्र के ख्वाहिशों का ताज है वो
पत्नी को कोई कष्ट न दे
सच में ऐसा अंदाज़ है वो।
एक कमीज़ ख़ुद के लिए
नहीं ख़रीद जो पाता है
मनपसंद कपड़े संतान को
सोचो कैसे दिलवाता है
कठिन परिश्रम करता है पर
चैन कहां वो पाता है
निः स्वार्थ रहा है जो अबतक
वो व्यक्ति पिता कहलाता है।
                                       ✍️चंचल कृष्णवंशी


Related Posts

मेरे किस्से -सतीश सम्यक

February 7, 2022

मेरे किस्से- सतीश सम्यक तुम्हें पता थाकिमैं तुम्हें पसंद करता हूँ।तभी तो तुम ,मुझे जलाने की खातिरनाम लिया करती थी

बेरोजगार हूं-दीप मदिरा

February 7, 2022

बेरोजगार हूं कभी कट्टर हिंदूवादी हूं कभी कट्टर भाजपा समर्थक हूं कभी कट्टर मोदी समर्थक हूं कभी कट्टर योगी समर्थक

जाति -पाति- -सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 6, 2022

जाति -पाति जाति-पाति में मत उलझो ,रहना है हमें हर ठाँव बराबर।सिर के ऊपर सूरज तपता ,तो पाँव केनीचे छाँव

नब्ज/नेता- सधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

नब्ज/नेता मैं नेता हूं मगर मैं दूसरे किस्म का नेता हूंगली गली नहीं भटकताजनता की नब्ज नहीं टटोलता,क्योंकि मुझे खुद

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम- सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

गाँधी जी तुम्हें प्रणाम हे बापू हे राष्टृपिता संत साबरमती केपुजारी अहिंसा केतुम्हें नमन हैकोटि कोटि प्रणाम है।देश में आज

दोस्तों के नाम की शाम-सुधीर श्रीवास्तव

February 6, 2022

दोस्तों के नाम की शाम आइए!कुछ करते नहीं तो बस इतना करते हैं,एक शाम दोस्तों के नाम करते हैं,मौज मस्ती

Leave a Comment