kavita vo phir kabhi nhi lauta by mahesh keshari
कविता.. वो, फिर कभी नहीं लौटा.. सालों पहले, एक आदमी, हमारे भीतर से निकला और, फिर, कभी नहीं लौटा… !! सुना …
कविता..
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यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी
February 3, 2022
यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की
नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “
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नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत
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February 3, 2022
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मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी
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