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poem, Veerendra Jain

Kavita : Virasat | विरासत

विरासत युद्ध और जंग से गुजरतेइस दौर में – सड़कों पर चलतेएंटी माइनिंग टैंकों औरबख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच- …


विरासत

Kavita : Virasat | विरासत

युद्ध और जंग से गुजरते
इस दौर में –

सड़कों पर चलते
एंटी माइनिंग टैंकों और
बख्तरबंद गाड़ियों की आवाज़ों के बीच-

स्कूलों पर गिरती मिसाइलों से
धराशायी होती इमारतों में
मासूमों की चीख पुकार के बीच-

आसमान में उड़ते
अचूक फाइटर जहाजों की
कर्णभेदी ध्वनि के बीच –

ढहे हुए घरों की छत में दबे
किसी बुजुर्ग के हाथों में
अपने जीवनसाथी की निशानी थामे
मिली लाशों की तस्वीरों के बीच –

अपने अपने घरों को छोड़
रास्तों पर मीलों चलते
लाखों विस्थापितों के
मौन संवादों के बीच –

जब हर कहीं
मज़हबी नफ़रतों के उन्माद स्वर
गूंज रहे हैं,
आने वाली पीढ़ियों के लिए
जो एक सबसे अच्छी विरासत
सहेजी जा सकती है,
वो इसी शहर के किसी बंकर में
भरी आंखों से विदा लेती
एक प्रेयसी की मुस्कान है !!

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur 
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13


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