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kavita thahar gyi hai nadi by ajay kumar jha

ठहर गई है नदी! मूक क्यों हो कुछ तो कहो कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो ठहरे जल में कंकर उछाल …


ठहर गई है नदी!

kavita thahar gyi hai nadi
मूक क्यों हो कुछ तो कहो
कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो
ठहरे जल में कंकर उछाल
अधोगति के बंध तोड़ दो
सृजित लहरों की गति से
उत्ताल तरंगों की संगति से
जमे जलकुंभी अवसाद को
प्रबल प्रवाह का प्रतिघात दो
जीवन प्रवाह को सदगति दो
श्रम शोणित को सम्मान दो
करुण क्रंदन में उल्लास भरो
इतिहास में अध्याय अंकित करो. 

———————————————-
@ अजय कुमार झा.
31/5/2021.

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