Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita thahar gyi hai nadi by ajay kumar jha

ठहर गई है नदी! मूक क्यों हो कुछ तो कहो कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो ठहरे जल में कंकर उछाल …


ठहर गई है नदी!

kavita thahar gyi hai nadi
मूक क्यों हो कुछ तो कहो
कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो
ठहरे जल में कंकर उछाल
अधोगति के बंध तोड़ दो
सृजित लहरों की गति से
उत्ताल तरंगों की संगति से
जमे जलकुंभी अवसाद को
प्रबल प्रवाह का प्रतिघात दो
जीवन प्रवाह को सदगति दो
श्रम शोणित को सम्मान दो
करुण क्रंदन में उल्लास भरो
इतिहास में अध्याय अंकित करो. 

———————————————-
@ अजय कुमार झा.
31/5/2021.

Click here👉 Like us on Facebook
Click here👉 Follow us on Instagram


Related Posts

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!!

March 25, 2022

ईमानदारी से छोड़ दो भ्रष्टाचार!!! भारत में अब आ गई है नवाचारों की बौछार डिजिटल पारदर्शी नीतियों से हो गए

कविता -मां की ममता

March 25, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है, कोई करता कोई नहीं मां

भाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान

March 25, 2022

कविताभाषा सर्टिफिकेट सेल्फी अभियान सांस्कृतिक विविधता को प्रोत्साहन करने बहुभाषावाद को बढ़ावा देने एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रसार करने

सुकूँ चाहता है-सिद्धार्थ गोरखपुरी

March 25, 2022

सुकूँ चाहता है ठिकाना बदलना जो तूँ चाहता है जमाने से क्या तूँ सुकूँ चाहता है?जमाना बुरा है तूँ कहता

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

March 25, 2022

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने

ईमानदारी कविता -जयश्री बिरमी

February 24, 2022

ईमानदारी कहां कहां ढूंढू तुझे बता दे जराढूंढा तुझे गांव गांव और गली गलीढूंढने के लिए तुझे मैं तो शहर

Leave a Comment