Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita sawan ki bund by kamal sewani

सावन की बूँद सावन की रिमझिम बूँदें जब ,   झरतीं नील गगन से ।  शस्य रूप अवलोकित होता ,   वसुधा …


सावन की बूँद

kavita sawan ki bund by kamal sewani

सावन की रिमझिम बूँदें जब , 

 झरतीं नील गगन से । 
शस्य रूप अवलोकित होता , 
 वसुधा के कण-कण से।। 
शुष्क पड़े सरवर का जल तल , 
यौवन मद उफनाता । 
नील सरोरुह प्रस्फुटित हो , 
रूपवैभव बिखराता ।। 
जलचर , थलचर , नभचर सबकी, 
खिल – सी उठती बाँछें । 
होते अतिशय मुग्ध मगन 
सब मिट जातीं उच्छ्वासें ।। 
घिरी घटाएँ देख मयूरों का , 
का उर हर्षित होता । 
नृत्य उनका सुंदरता का , 
अनुपम लड़ी पिरोता ।। 
खेतों में हरियाली , 
नव दुल्हन -सी है सज जाती । 
उद्यानों के द्रुम निखरकर , 
धरते रूप जवानी ।।
 पुष्प प्रफुल्लित हो शाखों पर , 
मनहर छवि दिखाते । 
भ्रमर वृंद रससिक्त होने को , 
गति वेग से आते ।।
नवयौवना भी उमंग पूरित हो , 
हैं नख-शिख सज जातीं । 
देख नजाकत ऋतु वैभव की , 
गीत मनोहर गातीं ।। 
मसलन दृष्टि जहाँ तक जाती , 
हर्षानंद दिखाता । 
जग को पुलकित करने को ही , 
मास ये श्रावण आता ।।
– कमल सीवानी
रामगढ़
सीवान
बिहार

Related Posts

कविता – रातों का सांवलापन

November 12, 2023

रातों का सांवलापन आकाश रात में धरती को जबरन घूरता हैक्योंकि धरती आसमान के नीचे हैऔर मेरा मनऊपर खिले उस

कविता –मंदिर में शिव जी

November 12, 2023

मंदिर में शिव जी मैं भक्ति का स्वांगी नहीं , पर आस्तिक जरूर हूँहालात बयां करूँया शिकायत मुझे बेल पत्तों

Kavita pavitra rishta | पवित्र रिश्ता

November 10, 2023

 शीर्षक: पवित्र रिश्ता सुनो दिकु… दुख अब अकेले नहीं सहा जा रहा तुम आज होती तो लिपटकर रो लेता मेरी

झांसी की रानी पर कविता | poem on Rani laxmi bai

November 10, 2023

झांसी की रानी पर कविता | poem on Rani laxmi bai रणचंड भयंकर और प्रचंड किया झांसी की रानी नेअपना

Kavita :आत्मायें मरा नहीं करती

November 10, 2023

आत्मायें मरा नहीं करती आत्मायें मरा नहीं करतीमैंने बचपन में सुना थाकिसी नायाब मुख से वे जिंदा रहती हैंअपने खेतों-

प्रेम इंतज़ार कर रहा है | kavita prem intezar kar raha hai

November 10, 2023

कविता : प्रेम इंतज़ार कर रहा है सुनो दिकु…दिल के दर्द की पीड़ा अब नहीं सही जा रहीमेरे होंठों पर

PreviousNext

1 thought on “kavita sawan ki bund by kamal sewani”

Leave a Comment