सावन की बूँद
सावन की रिमझिम बूँदें जब ,
–
रामगढ़
सीवान
बिहार
सावन की बूँद सावन की रिमझिम बूँदें जब , झरतीं नील गगन से । शस्य रूप अवलोकित होता , वसुधा …
सावन की रिमझिम बूँदें जब ,
August 30, 2022
कन्यादान नहीं, कन्या-सम्मान। यह कैसा शब्द है कन्यादान, कौन करता है अपनी जिंदगी को दान,माता- पिता की जान से बढ़कर,कैसे
August 28, 2022
हां मैं हूं नारीवादी! नारीवाद के प्रमुख प्रकार, स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार,ऐसा विश्वास या सिद्घांत,भेदभाव का हो देहांत,और
August 28, 2022
कविता: खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता खुद गरीब पर बच्चों को अमीर बनाते हैं पिता कभी
August 25, 2022
“कब प्रशस्त होगी हर नारी” अब एक इन्कलाब नारियों की जिजीविषा के नाम भी हो, तो कुछ रुकी हुई ज़िंदगियाँ
August 25, 2022
वजह-बेवजह रूठना। वजह-बेवजह क्यों बार-बार रूठना,छोटी-छोटी बातों पर बंधनों का टूटना,क्यों ना जीवन में समझदारी दिखाएं,शिष्टाचार, प्रेम और स्वाभिमान के
August 22, 2022
शहर गांवों के सपने संभाल लेता है शहर हो जाओ दूर कितना भी पास बुला लेता है शहर । गांवों
हार्दिक आभारी!