Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita sarkari aakado me by jitendra kabir

सरकारी आंकड़ों में… सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती हैं सिर्फ मौतें, दर्ज नहीं होती लेकिन उनमें मरने वालों की तकलीफें, …


सरकारी आंकड़ों में…

kavita sarkari aakado me by jitendra kabir

सरकारी आंकड़ों में

दर्ज होती हैं सिर्फ मौतें,

दर्ज नहीं होती

लेकिन उनमें

मरने वालों की तकलीफें,

जिंदा बने रहने की

जद्दोजहद में

मौत से उनका संघर्ष,

उनके परिजनों का

करुण रुदन,

एक पूरी उम्र के लिए

अपने साथी का अभाव,

हर मुसीबत को पहले अपने

सिर लेने वाले

मां-बाप का अभाव,

जिंदगी के हर एक पल में

मां-बाप के हृदय को सालता

औलाद का अभाव।

दर्ज नहीं होती उनमें

अस्पतालों की कमी,

डॉक्टरों, बिस्तरों व

जीवनरक्षक उपकरणों की कमी,

दवाइयों की कमी,

व्यवस्था की लापरवाही,

स्वास्थय सेवाओं में

होता भ्रष्टाचार और

दिन-प्रतिदिन आम आदमी की

पहुंच से दूर होता इलाज।

दर्ज जिस दिन होने लगेगा

सरकारी आंकड़ों में

यह सब कुछ भी,

जी उठे उम्मीद शायद

इन आंकड़ों में सुधार की।

जितेन्द्र ‘कबीर’

साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’

संप्रति – अध्यापकपता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश


Related Posts

कमज़ोर तू मां | kamjor tu maa

December 10, 2022

कमज़ोर तू मां मेरा बेटा बोला मां कमज़ोर मां तू कहलाईअपने हक पर तू हक ना जताईतेरे लिखे शब्द में

व्यंग्य कविता–मैं भ्रष्टाचारी कहलाता हूं| Mai bhrastachari kehlata hun

December 10, 2022

 यह  कविता भ्रष्टाचार पर व्यंग्यात्मक कुटिल कटाक्ष है।जिसका परिणाम बच्चों बीवी मां सहित परिवार की बीमारी से निकलता है।जिसका संज्ञान

अप्सेंट रहता हूं पर हाजिरी लगती है| absent rahta hun par haziri lagti hai

December 10, 2022

यह व्यंग्यात्मक कविता शासकीय ऑफिस में कर्मचारी ड्यूटी पर होकर भी राउंड के बहाने कैसे घूमते फिरते, बाहरगांव जाते, ऑफिस

व्यंग्य कविता-अभी-अभी भ्रष्टाचार केस में सस्पेंड हुआ हूं| abhi abhi bhrastachar case me suspend hua hun

December 10, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भ्रष्टाचार में सस्पेंड होने के बाद फ़िर हरे गुलाबी के दम पर वापिस पदासीन होने और मिलीभगत

व्यंग्य कविता-नियमों कानूनों की धौंस बताता हूं niyamo kanoono ki dhaus batata hun

December 10, 2022

यह  व्यंग्यात्मक कविता हर शासकीय कार्यालय में लटकाने, भटकाने और माल चटकाने की प्रथा पर व्यंग्यात्मक कटाक्ष पर आधारित है 

मैंने भी भूमि संपादन की मलाई खाई| maine bhi bhumi sampadan ki malai khai

December 10, 2022

 यह व्यंग्यात्मक कविता भूसंपादन की स्थिति में सामान्य पड़ित ज़मीन को ओलित सिंचित या एनए करवाकर डबल से दस गुना

PreviousNext

Leave a Comment