Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mausam-Khan, poem

kavita sangharsh by mosam khan alwar

संघर्ष संघर्ष है जिसके जीवन में उसे जीवन का सार हैनित जीवन में करते हम संघर्ष जीवन का आधार हैउठ …


संघर्ष

kavita sangharsh by mosam khan alwar
संघर्ष है जिसके जीवन में उसे जीवन का सार है
नित जीवन में करते हम संघर्ष जीवन का आधार है
उठ राही संघर्ष कर, एक बार नहीं tu बार बार कर,
संघर्ष बना अपनी जिन्दगी हुआ भव सागर से पार है।।

है संघर्ष कदम कदम पर, जीवन जीना संघर्ष का नाम,
सफल असफल ही संघर्ष है,संघर्ष जीत का दूजा,नाम।
आज नहीं तो कल होगी,होगी जीत संघर्ष की,
कर संघर्ष मंजिल को,संघर्ष ही पहचान बना तू,नाम ।।

प्रकृति में चारो ओर,मुझे संघर्ष संघर्ष नजर आता है,
अपना गौरव, तुझे हराना, छल कपट, नजर आता है,
मुझे तुझ से नहीं तेरे संघर्ष से नफ़रत है,
तू हर जीत,जीतता है संघर्ष से,मुझे हारता नजर आता है

संघर्ष इतिहास बनाता, नामुमकिन को मुमकिन बनाता।।
है संघर्ष की ही ताकत,जो पानी पहाड़ो में रस्ता बनाता है।
चीर अंधेरा फैलाए अपनी आभा, नित सुरज का है संघर्ष,
है संघर्ष यदि तेरा हमदम, जीवन सरल बन जाता है।।

उठ संघर्षी छोड़ निराशा, मंजिल को तू दे ललकार,
लगा गेल संघर्ष को,दे हार को तू फटकार।
बना इतिहास अपना अब तू ए संघर्षी,
संघर्ष तेरे साथ है कर अब सपने साकार।।

मौसम खान
अलवर राजस्थान


Related Posts

आया है नवरात्रि का त्योहार

October 16, 2023

आया है नवरात्रि का त्योहार आया है नवरात्रि का त्योहार।नवरात्रि में माँ का सजेगा दरबार।गली-गली गूँजेंगे भजन कीर्तन,माँ अंबे की

कविता – अश्रु | kavita – Ashru

October 14, 2023

कविता – अश्रु ये आसू नही मेरा क्रोध है,क्यू तुम्हे नही ये बोध है,कमजोर मत समझो तुम मुझे,यह तुम पर

कविता -अभिव्यक्ति का अंतस्

October 14, 2023

अभिव्यक्ति का अंतस् आहूत हो रही हैभाव की अंगडा़ईमन की खामोश और गुमसुम परछाई मेंकि कहीं कोई चेहरा… चेहरे की

मां है घर आई

October 14, 2023

मां है घर आई मां है घर आई चहुं दिग खुशियां छाईं झूम उठा है कण-कण माटी का हर चेहरे

कविता – बस आ जाओ

October 14, 2023

कविता  : बस आ जाओ सुनो दिकु….. मुज़ से कोई खता हुई है, तो बता दो ना रुख से अपने

ये अंधेरी रात| kavita: ye Andheri rat by veena adavani

October 9, 2023

ये अंधेरी रात ये तंहाई भरी अंधेरीगहरी काली रातहमे डराते हैं।। ये उमड़े घुमड़ते बादलदेख हम अक्सर कितनाडर जाते हैं।।

PreviousNext

Leave a Comment