Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita sakhi keh do by anita sharma

 सखी कह दो” अभिलाषा में आशा जोड़ू,सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।इच्छाओं का अंबार समेटू,या अनुरागी पथ को चुन लूँ। …


 सखी कह दो”

kavita sakhi keh do by anita sharma


अभिलाषा में आशा जोड़ू,
सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।
इच्छाओं का अंबार समेटू,
या अनुरागी पथ को चुन लूँ।

आत्म की अनुभूति खोजूं,
या जीवन अनुराग भरूँ।
निश्चय का दृढ़ संकल्प भरूँ,
या निर्णय की दृढ़ता जोड़ू।

सखी कह दो मैं क्या जोड़ू ,
रिश्तों की स्नेही डाल चुनू।
या कर्तव्यों की राह चलूँ ,
इच्छाओं की चाह चुनू।

अभिलाषाओ की माला गूँथू,
या आंकाक्षाओ के ख्वाब चुनू।
जीवन के पथ पर चलते ,
सखी कह दो मैं क्या जोड़ू।

नेह,स्नेह अपनापन जोड़ू,
प्रेम भरा परिवार सजाऊँ।
रिश्तों की बारीकी चुनकर,
अपनों का सुख चैन भरूँ।

सखी कह दो मैं क्या जोड़,
रैन नेह और चाह भरूँ। ।

*अनिता शर्मा*
*स्वरचित रचना*

Related Posts

नए साल में नई शुरुआत-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

नए साल में नई शुरुआत! नया-नया सा साल, नई नई सी बातें,नया नया सब कुछ है, नई नई सौगातें,नए-नए से

वह एक ही परम शक्ति-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

वह एक ही परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने

गुणगान ( गुरु)- तेज देवांगन

January 7, 2022

गुणगान( गुरु) कितना करूं गुणगान इनका,मेरे अल्फाज कम पड़ जाएंगे,अगर पीरों भी लूं इन्हे तारो में,मेरे साज कम पड़ जाएंगे.कितना

अकेला!-डॉ. माध्वी बोरसे

January 7, 2022

अकेला! दुख में हमेशा इंसान अकेला होता है, सुख में दुनिया उसके साथ होती है! उत्साह के लिए इंसान हमेशा

पधारो म्हारो राजस्थान-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

पधारो म्हारो राजस्थान! जीवंत संस्कृति, रेतीली मरुस्थलीय भूमि,  ऊंट पर बैठकर सवारी,  जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है

मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

मसूरी-जन्नत सा शहर! मसूरी भारत देश के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर, बहुत सुहावने मौसम का अनुभव देती है

Leave a Comment