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कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा
June 2, 2021
कविता – पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । पहले जैसा नहीं रहा गांव आज मेरा । देख कर
kavita agar chahat hai kabhi kisi ke dil me bus jaane ki
June 2, 2021
कविता अगर चाहत है कभी किसी के दिल में बस जाने की, कभी गलती मत करना उसको आजमाने की। अगर
gazal aaj kal shahar me ek fasana sare aam ho gya
June 2, 2021
ग़ज़ल आजकल शहर में एक फ़साना सरे आम हो गया, जब से यार मेरा सियासी लोगो का गुलाम हो गया
kavita thahar gyi hai nadi by ajay kumar jha
June 2, 2021
ठहर गई है नदी! मूक क्यों हो कुछ तो कहो कर्णभेदी गूंज में हूंकार करो ठहरे जल में कंकर उछाल
kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri
June 2, 2021
कविता.. इस धरा पर औरतें.. हम, हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी नहीं पातीं .. !! और, आजीवन
kavita ahankar by mosam khan alwar
June 2, 2021
कविता–अहंकार अहंकार एक अंधियारा है,जग में सबसे ये न्यारा है,ऊंच नीच का भेद नहीनित जीवन में ललकारा है।। अहंकार में

Good mosam bhai