Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita Roti mosam khan alwar rajasthan

  कविता -रोटी                                          …


  कविता -रोटी                    

   

kavita Roti mosam khan alwar rajasthan

                

 
कोई भागता जग में शोहरत को
कोई भागता जग में रोटी को,,
मंज़िल अलग अलग दोनों की,
लेकिन जोर लगते ऐड़ी चोटी को ।।

मै सब की भूख मिटा देती हु,,
मेरी औकात का उसको पता नही,
जाकर पूछो किसी भूखे  को,
कितना काम बड़ा है रोटी को ।।

कितना स्वार्थी है तू मानव  ,      
भागमभाग में मुझको भूल गयो,
हक ईमान आज ताक पर लगा कर
तू  खाना भूल गयों रोटी को ।।।

जब तेरे घर में तकरार हुई थी ।
तूने  मुझको  खाना छोड़ दिया,
मै  मेरी   कमी आज तुझ से पूछूं ,
कहा कसूर था रोटी को ।।।

जे तुझ से में  रूठ गई,
तेरी औकात दिखादूंगी
जिनके लिए तू आज भाग रहा,
तेरा नाम नही लेगा वो रोटी को।।।

लेकिन तुझको में नहीं भूली,
 तेरे सब करतूत माफ़ किया किया,
तेरे नसीब में हु तुझको मिल जाऊंगी,
किसी गरीब का  गला मत काटना रोटी को

सुख दुख आते जाते जग में,
आज यह निवेदन मौसम का
जो भी आता तुम्हारे दर पे,,
तुम नाम लेना उसका रोटी को।।।।।।।
                  

                स्वरचित   मौसम खान

                 अलवर ,राजस्थान 

           

Related Posts

यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी

February 3, 2022

यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

February 3, 2022

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत

तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “

February 3, 2022

तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से ऊँचा हो गया कद लोगों का जमीन सेसुना है जमीनें बंजर पड़ी

मेरे यार फेसबुकिए-सिद्धार्थ गोरखपुरी

February 3, 2022

मेरे यार फेसबुकिए मेरे यार फेसबुकिए बता दो इस समय तुम हो कहाँमैंने तुम्हें ढूंढ रहा हूँयहाँ -वहाँ न जाने

1 thought on “kavita Roti mosam khan alwar rajasthan”

Leave a Comment