Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita Prithvi by priya gaud

 “पृथ्वी “ पृथ्वी के उदर पर जो पड़ी हैं दरारें ये प्रमाण है कि वो जन्म चुकी है शिशु इतंजार …


 “पृथ्वी “

kavita Prithvi by priya gaud

पृथ्वी के उदर पर जो पड़ी हैं दरारें

ये प्रमाण है कि वो जन्म चुकी है शिशु

इतंजार में है उस मरहम के

जो भर दे उसकी दरारें

और खिल सके पृथ्वी की कोख़ में

नन्ही नन्ही कोपलें

लौट आए बसंत

फिर खुद पर इतराए जंगल

हरे भरे हो पेड़ औऱ पहाड़

सुनाई दे पंक्षियों का कलरव

और पंख पसारे नाचे मोर

पूरी धरती सजे अपने जन्मे अनगिनत

बच्चों के हर रंग से राग से प्यार से

जिए उसका ख़ुद का बसन्त

जो सौंपा है उसने हमारे हाथ सदियों से…..

-प्रिया गौड़ 


Related Posts

कविता – न मिला

September 1, 2022

कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती

कविता – बे-परवाह जमाना

September 1, 2022

कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है

कविता – नयन

September 1, 2022

कविता – नयन दोनों नयन सावन बनकररिमझिम – रिमझिम बरसात करेंसमझ तनिक आता ही नहींके कितने हैं जज़्बात भरे मौन

कविता -शहर चलाता है

September 1, 2022

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

PreviousNext

Leave a Comment