Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita Prithvi by priya gaud

 “पृथ्वी “ पृथ्वी के उदर पर जो पड़ी हैं दरारें ये प्रमाण है कि वो जन्म चुकी है शिशु इतंजार …


 “पृथ्वी “

kavita Prithvi by priya gaud

पृथ्वी के उदर पर जो पड़ी हैं दरारें

ये प्रमाण है कि वो जन्म चुकी है शिशु

इतंजार में है उस मरहम के

जो भर दे उसकी दरारें

और खिल सके पृथ्वी की कोख़ में

नन्ही नन्ही कोपलें

लौट आए बसंत

फिर खुद पर इतराए जंगल

हरे भरे हो पेड़ औऱ पहाड़

सुनाई दे पंक्षियों का कलरव

और पंख पसारे नाचे मोर

पूरी धरती सजे अपने जन्मे अनगिनत

बच्चों के हर रंग से राग से प्यार से

जिए उसका ख़ुद का बसन्त

जो सौंपा है उसने हमारे हाथ सदियों से…..

-प्रिया गौड़ 


Related Posts

स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है

March 5, 2023

भावनानी के भाव  स्थानीय भाषाओं में नवाचार कार्यक्रम चलाया है नवाचार में तीव्र विकास करने समृद्ध करने भाषाई अड़चनों को

हे राम!! | Hey ram

March 5, 2023

हे राम!! राम तुम क्यूं ना बन सके प्रैक्टिकल,कि जब मेघनाद का तीर लगा लखन को,क्यों तुमने द्रवित किया था

द्वारिका में बस जाओ

March 5, 2023

 द्वारिका में बस जाओ वृंदावन में मत भटको राधा, बंसी सुनने तुम आ जाओ । कान्हा पर ना इल्जाम लगे,

सब्र। सब्र पर कविता| kavita -sabra

March 5, 2023

 सब्र। जब आंखें नम हो जाती है, जब आत्मा सहम जाती है, उम्मीद जिंदा नहीं रहती, जिंदगी गम से भर

मेरी दादी माँ| meri dadi maa

March 5, 2023

 मेरी दादी माँ आज की शाम मेरी दादी के नाम कर रहे सब आज तुम्हारी बातें इकट्ठा हो घर के

नम्रता का आभूषण धारण करना होगा

March 4, 2023

 भावनानी के भाव नम्रता का आभूषण धारण करना होगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो  अटके काम बनाना है तो 

PreviousNext

Leave a Comment