kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari
पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार.. मंझली काकी और सब कामों के तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और बैठ …
Related Posts
कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज
आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता
सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी
इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके
सिखाने की कोशिश करें- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करेंअपने बच्चों को खाना बनाना भीपढ़ाई के साथ-साथ,वरना लाखों के पैकेज पाने वालों
मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ- जितेन्द्र ‘कबीर’
January 6, 2022
मृगतृष्णा है तुम्हारा साथ ‘तुम्हारा साथ’ मेरे लिएहै एक तरह कीमृगतृष्णा सा,दूर कहीं झिलमिलाताहुआ साबुलाता है मुझे अपने पास,तुम्हारे दुर्निवार
