kavita- pacchim disha ka lamba intjaar by mahesh keshari
पच्छिम दिशा का लंबा इंतजार.. मंझली काकी और सब कामों के तरह ही करतीं हैं, नहाने का काम और बैठ …
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चाह-तेज देवांगन
January 7, 2022
शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार
हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल
January 6, 2022
हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी
लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी
January 6, 2022
लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश
बहरूपिया-जयश्री बिरमी
January 6, 2022
बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना
लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी
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नन्हीं कड़ी में…. आज की बात लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत
कोशिश-नंदिनी लहेजा
January 6, 2022
विषय-कोशिश कोशिश करना फ़र्ज़ तेरा, बन्दे तू करता चल।भले लगे समय पर तू, निश्चित पाएगा फल।रख विश्वास स्वयं पर, और
