कविता:निरुत्तर
निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुम
प्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम।
कविता:निरुत्तर निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुमप्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम। शान्त होकर सिर्फ प्रसन्न रहो, …
निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुम
प्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम।
February 14, 2021
poem जब से तुझ से जुड़ा फूल सा खिल गया सूखे मधुबन में जैसे कँवल खिल गया अकेले पन में
February 8, 2021
कविता जब देखता हूं जिधर देखता हूं दिख जाती हो मोटे मोटे किताबों के काले काले शब्दों में दिख जाती
February 8, 2021
ग़ज़ल हर वादे पर आशा किया ना करो पराधीन होकर जिया ना करो लगी है
February 8, 2021
ग़ज़ल पीले पीले फूलों में अब जाकर गुनगुनाना हैरोने वाले को हंसाना है सोने वाले को जगाना है समय के
February 6, 2021
ग़ज़ल ज़िन्दगी में मेरे आना तेरा प्यार हर पल मेरा, निभाना तेरा भूल जाऊं मैं कैसे तुझको सनम प्यार गंगा