Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita mujhse aa kar ke mil raha koi

कविता -मुझसे आ करके मिल रहा कोई। मुझसे आ करके मिल रहा कोई। ख्वाब आंखों में पल रहा कोई। सूना …


कविता -मुझसे आ करके मिल रहा कोई।

kavita mujhse aa kar ke mil raha koi

मुझसे आ करके मिल रहा कोई।

ख्वाब आंखों में पल रहा कोई।

सूना सूना था सरोवर दिल का
आज सतदल है खिल रहा कोई।

तेरे आने से ऐसा लगता है
चांद छत पर उतर रहा कोई।

जबसे छाए हैं फलक पर बादल
तबसे दरिया मचल रहा कोई।

उनसे मिलने की तड़प ऐसी है
भरी बारिश में जल रहा कोई।

इन हवाओं में कुछ खुमारी है
जैसे मौसम बदल रहा कोई।

किसी “किंजल्क” से मिलने के लिए
मेरे दिल में सवंर रहा कोई।
       
                            किञ्जल्क त्रिपाठी “किञ्जल्क”
                             आजमगढ़ (उ.प्र)

Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment