Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita meri kavitaon mein jitendra kabir

मेरी कविताओं में… मेरी कविताओं में है… तुमसे जो मिली थी पहली नजर और उसके बाद निहार पाया तुम्हें जितना …


मेरी कविताओं में

kavita meri kavitaon mein jitendra kabir



मेरी कविताओं में है

तुमसे जो मिली थी

पहली नजर

और उसके बाद निहार पाया

तुम्हें जितना

उन सब खुशियों का असर।

मेरी कविताओं में है

तुमसे जो हुई थी

पहली मुलाकात

और उसके बाद कर पाया

तुम्हें जितना

अपने मन में आत्मसात।

मेरी कविताओं में है

तुम्हारा हंसनामुस्कुराना,

मस्ती में गुनगुनाना

और कभी तुम्हारा उदास होना,

चुपके से आंसू बहाना।

मेरी कविताओं में है

तुम्हारा पहली बार मेरे

करीब आना

और उन लम्हों में तुम्हारा

शर्माना,घबराना हिचकिचाना।

मेरी कविताओं में है

तुमसे जुदा होने का एक

लाईलाज सा दर्द भी

और तुम्हारी हर बात को

कविता में उतारने का मर्ज भी।

मेरे जीवन में तुम्हारा होना

कविता का होना है

और नहीं होना

एक कभी ना भरने वाले

रिक्त स्थान का होना है।

                   –   जितेन्द्रकबीर

जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश



Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment