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kavita mera bharat by madhu pradhan

मेरा भारत मेरा प्यारा सबसे न्यारा भारत देशकल- कल करके नदिया बहती झर-झर करके झरने बहते आँखों में बसते दृश्य …


मेरा भारत

kavita mera bharat by madhu pradhan

मेरा प्यारा सबसे न्यारा भारत देश
कल- कल करके नदिया बहती
झर-झर करके झरने बहते
आँखों में बसते दृश्य मनोहर।
नित्य नये त्योहार मनाते
आलाप मधुर संगीत सुनाते
बच्चो के मन चहक -चहक है जाते
रसमयी गागर सब छलकाते।
सूर्य चन्द्र नक्षत्र और पशु-पक्षी भी
यहाँ हैं पूजे जाते ।
पूर्ण तुष्ट हो अतिथि जाते
गुणगान यहा का वे सुनाते।
कभी नहीं है पर्वत घाटो की
गेंहू चना धान मक्का के

खेत खूब लहराते
फल फूलो के बाग बगीचे
इस धरती की है शान ।
भरी हुई है प्रकृति संपदा
सहर्ष लुटाते सब पर
भारत में आपस में
मेल बढ़ाती सी है
अनेक भाषाएँ वेशभूषा
यह बात किसी
को पच नहीं पाती
इस देश की यही है थाती।
बारी-बारी मौसम है आते
रोज नये रंग बरसाते हैं
परिवारों का बंधन है मजबूत
यहाँ चट्टानों सा है जीवन सबका।
वीर शिवाजी औ लक्ष्मीबाई की
गाथाएँ सबको याद जवानी है
शहीद भगत और आजाद की
सरफरोशी की तमन्ना
सबने ही संमानी है।
वेद व्यास औ कृपाचार्य का
बुद्धि बल व्याप्त हुआ जगह में
गौतम बुद्ध ,महावीर से ऋषियो ने
अपने उपदेशों से लोगों में फूँका
ऐसा मन्त्र मनोहर
उमड़ पड़ी जन जन में
त्याग तप श्रृद्धा की इच्छा
भरत नाम से बना यह भारत देश
करते शत-शत तुम्हें प्रणाम।।
मधु प्रधान मधुर
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