कविता – मॉं
धन्य है ! मॉं
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर । …
धन्य है ! मॉं
June 4, 2021
औरत पैदा होती है बनाई नहीं जाती सूत दो सूत का अंतर रहा होगा दोनों बच्चों मेंडील डौल कपड़े लत्ते
June 4, 2021
व्यवस्था समर्थक बनिए व्यवस्था पर कोई भी आरोप लगाने से पहले सौ बार सोच लीजिए ( चाहे वो सही क्यों
June 4, 2021
“कितनी लहरें बाकी हैं” कितनी लहरें अभी बाकी हैं,कितनी लहरें आकर जा चुकी । कितने बवंडर उठे यहाँ ,कितने रिश्तों
June 4, 2021
लबों पे प्यार की कहानी रखना लबों पे प्यार की कहानी रखना गमें दरिया में हरदम रवानी रखना इश्क़ तो
June 4, 2021
साथियों हमारी मेवाती भाषा में मेने चार लाइनें जोड़ने की कोशिश की है उम्मीद करता हु आपको पसंद आएंगी हौसलाफ़जई
June 3, 2021
कविता:निरुत्तर निरुत्तर होकर भी, उत्तर खोज लो तुमप्रश्न में समस्या का हल खोज लो तुम। शान्त होकर सिर्फ प्रसन्न रहो,