कविता – मॉं
धन्य है ! मॉं
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर । …
धन्य है ! मॉं
June 22, 2021
हमारे संस्कार माना कि आधुनिकता कामुलम्मा हम पर चढ़ गया है,हमनें सम्मान करना जैसेभुला सा दिया है।पर ऐसा भी नहीं
June 22, 2021
गीत गीता का गायन कर गोविंद में,जीवन दर्शन दर्शाया है,कुरुक्षेत्र का नाम है केवलअंतर्द्वंद हमारा है। ।। मैं अकिंचन भाव
June 22, 2021
गीत आराध्य तुम्ही, आराधना मेरी,साध्य तुम्ही, साधना भी मेरी । स्वर्गलोक से चल कर आयी ।।कल कल,छल छल गंगा जैसी,
June 9, 2021
महामारी का साया किसी को घेर लिया है घोर निराशा ने, किसी के मन में मौत का डर समाया है,
June 9, 2021
अभिलाषा जब प्राण तन से निकले, तब पास तुम ही रहना। आँखे मेरी खुली हो, पलकें तुम ही बंद करना।
June 9, 2021
कविता.. वो, फिर कभी नहीं लौटा.. सालों पहले, एक आदमी, हमारे भीतर से निकला और, फिर, कभी नहीं लौटा… !! सुना