कविता – मॉं
धन्य है ! मॉं
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर । …
धन्य है ! मॉं
July 23, 2021
ख्वाब गहरी नींद में खो गये थे, बंद आँखो ने संजोए ख्वाब। बहुत गहन रात्रि थी तब, घर की चार
July 19, 2021
बड़ा दिल सबके पास होता नहीं अपनी जरूरत से बढ़कर पैसा होता है बहुतों के पास लेकिन किसी जरूरतमंद की
July 19, 2021
बेरोजगारी बेरोजगारी के मार से युवा दल बेहाल है। जितने भी है रोजगार योजना से नेता गण निहाल है। जनता
July 19, 2021
ठोर बेटियों पर अत्याचार, चारों तरफ हैं फैलें ठोर । जाहिलों को विद्वान, तो विद्वानों को समझे ठोर ।। रक्षा
July 19, 2021
मुर्दों की बस्ती जुल्म करना तो यहाँ ,हैवानों की मस्ती हैं । मिटा दे खानदान को, वो बड़ी हस्ती हैं
July 19, 2021
बारिश हे बारिश बार बार मत आया कर । जब जब तुम आती हो तब बंद हो जाता है धयाड़ी