कविता – मॉं
धन्य है ! मॉं
कविता – मॉं धन्य है ! मॉं धन्य मॉं की ममता । नौ मास मुझको, रखा गर्भ के भीतर । …
धन्य है ! मॉं
July 31, 2021
पीढ़ियों का अंतर बच्चे! वर्तमान में जीना चाहते हैं अपने बाल मन के कारण, इसलिए मौका मिलता है जब भी
July 25, 2021
शीर्षक – ” देवताओं के गुरु बृहस्पति” जो अंधेरे से उजाले की ओर ले जाए, वही तो हम सबका गुरु
July 23, 2021
शीर्षक चल छोड़, ये आदत है, कोई खता नहीं l तेरे फ़िक्र में हैं हम और तुझे पता नहीं l
July 23, 2021
अभिलाषा अधरों पे मुस्कान लिए, शहरों में अब गांव मिले, मधुर वाणी की सरगम में, शहरों में अब गांव पले,
July 23, 2021
शीर्षक-जिंदगी का वादा कहीं कम तो कहीं ज्यादा, बस यही है जिंदगी का वादा, कहीं धूप कहीं छाया, बस यही
July 23, 2021
शब्दों की चोट शब्दों की चोट जब पड़ती है। चित्त में चेतना की चिंगारी निकलती है।। जैसे बसंत में भी