Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

Kavita – Maa -pawan kumar yadav

 कविता – मॉं  धन्य है ! मॉं  धन्य मॉं की ममता ।  नौ मास मुझको,  रखा गर्भ के भीतर ।  …


 कविता – मॉं 

Kavita - Maa -pawan kumar yadav

धन्य है ! मॉं 

धन्य मॉं की ममता । 
नौ मास मुझको, 
रखा गर्भ के भीतर । 
जन्म दिया उपकार मुझपर किया, 
तेरा ऋण न जाय चुकाया। 
बिना स्वार्थ पाला मुझको, 
गुरू बन दी पहली शिक्षा मुझको ।
अचरा से बांध मुझको, 
दुःख की छाया से रखा दूर मुझको । 
सारा शरीर कर्ज है तेरा,
फिर भी अहम् नहीं तुझको । 
धन्य है ! माँ 
धन्य मॉं की ममता ‌।

-पवन कुमार यादव (जौनपुर)


Related Posts

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

छोड़ दो नफरत करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

छोड़ दो नफरत करना सिर्फ इसलिए कि कुछ बाघ नरभक्षी निकल जाते हैं,तो क्या दुनिया से उनका वजूदमिटा दिया जाना

मानव तन – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

 मानव तन अनमोल  यह तन पानी का बुलबुलामाया नगरी यह है संसारतारण हार प्रभु संग हैखोज लो बारम्बार बीता हुआ

Leave a Comment