kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri
कविता.. इस धरा पर औरतें.. हम, हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी नहीं पातीं .. !! और, आजीवन …
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November 10, 2023
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कविता –करवा चौथ
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करवा चौथ सुनो दिकु…..अपना सर्वस्व मैंने तुम्हें सौंप दिया हैतुम्हारे लिए मैंने करवा चौथ व्रत किया है तुम व्रत करती
कविता –मैं और मेरा आकाश
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क्या हुआ आज टूटा है इंसान क्या हुआ जो आज बिखरा है इंसानक्या हुआ जो आज टूटा हुआ है इंसानअरे
कविता – याद करती हो?
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याद करती हो? सुनो दिकु…. क्या आज भी तुम मुज़े याद करती हो?मेरी तरह क्या तुम भी, आँखें बंदकर मुज़
