kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri
कविता.. इस धरा पर औरतें.. हम, हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी नहीं पातीं .. !! और, आजीवन …
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लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया
May 14, 2023
लेखिका वीना कह बुलाए दुनिया कलम प्रखरव नहीं थी मेरी इसे प्रखरव बनाया है।।हर गहरा ज़ख़्म मेरा शब्दों में ज़हर
मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार
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मातृदिवस विनयांजलि-मॉं मेरा जीवन आधार मातृदिवस विनयांजलि तेरा नाम जुबां पे आते ही मेरे दर्द सभी थम जाते हैं ,माँ
हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक
May 11, 2023
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मेरे अपने ……. (Mere apne)
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एक कोशिश , जरिया बनने की ज़हर जो उगले मेरी कलम छील के ये रख देती हैक्रोध कि ज्वाला धधक
कविता – अंधेरे की आवाज़ | Andhere ki awaz
April 26, 2023
अंधेरे की आवाज़ तालाब शांति में समुद्रीय हलचलविश्व का दूरस्थ प्रतिमान,जो नहीं खोज पाया खोज ही नहीं पायाकविता और कहानियों
