kavita is dhara par aurat by mahesh kumar keshri
कविता.. इस धरा पर औरतें.. हम, हमेशा खटते मजदूरों की तरह, लेकिन, कभी मजदूरी नहीं पातीं .. !! और, आजीवन …
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ठेकेदारों का विकास छोटा ठेकेदार पंचायत स्तर पर करता है प्रचार और समर्थन ‘दल विशेष’ का, बदले में पाता है
Talash zindagi ki by komal Mishra koyal
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तलाश ज़िंदगी की क्या कुसूर मेरा था, बस अपने घर को छोड़ा था। पूरे हो सके ख़्वाब इन आँखों के,
Bhul jane ki takat rakhte hai by vijay Lakshmi Pandey
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भूल जानें की ताक़त रखते हैं …!! हर लम्हा गुज़रता है मेरा , दर्द के आग़ोश में । जख़्म
Hamari raahen alag hai by Jitendra Kabir
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हमारी राहें अलग हैं अगर तुम चाहते हो, मैं न बोलूं गलत को ग़लत और सही को सही, बेजुबान बन
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प्राण-प्रिय अधरों पर कुसुमित प्रीत- परिणय केशों में आलोकित सांध्य मधुमय चिर- प्रफुल्लित कोमल किसलय दिव्य-ज्योति जैसी मेरी प्राण-प्रिय 1
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मधुर संगीत वीणा का तेरी वीणा की मधुर ध्वनि, मां सदा भाव भर देती है, अंधकार भरे अंतर उर में,
