Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita-haiwaniyat by antima singh

 कविता-हैवानियत कमजोर जानकर किसी को क्युं सताते हैं लोग, मासूम दिलों पे पत्थरों की बौछार क्युं चलाते हैं लोग, कभी …


 कविता-हैवानियत

kavita-haiwaniyat by antima singh


कमजोर जानकर किसी को क्युं सताते हैं लोग,
मासूम दिलों पे पत्थरों की बौछार क्युं चलाते हैं लोग,
कभी सोचते हैं क्युं नहीं कि वे भी हैं दुनियां में ही,
कभी उनके भी दिल को चोट पहुंचाएंगें लोग,
नमक फिर उसी चोट के घावों पर फैलाएंगे लोग,
है गरीब उसकी बस इतनी सी खता है,
रोटियों के टुकड़ो को तरसता ही वह सदा है
लाख वह सही हो अपनी राह पर तो क्या,
फिर भी उसकी खिल्लियां उड़ाते हैं लोग,
मजबूर वादियों में उसे क्युं जलाते हैं लोग,
इसां तो वह भी है, आत्मा भी तो है वही उसकी,
फिर भी गिरा है वह, दिवाना क्युं निगाहों में सबकी, 
अभी जो उसने चोट खायी है ,हम सा नहीं है क्या,
मर्जें दिल पे क्युं न मरहमें लगाते हैं लोग,
संतप्तवक्षा को क्युं फिर-फिर जलाते हैं लोग,
दलीलें दे नहीं सकता जो अपने, शेष बचे अधिकारों पे,
चलना पड़ता ही जिसको, नंगी तलवार की धारों पे,
जीवन की बंजर-बाग में कुछ,बीज आस के जो बोया,
उसके उद्भूत उम्मीदों को क्युं,फिर से कुचल जाते हैं लोग,
कहो ‘अन्तिमा’ दिनोंदिन यूं, ‘हैवानियत’ क्युं बढ़ाते हैं लोग।।
धन्यवाद!
                             -अन्तिमा सिंह(स्वरचित,मौलिक)
                                -अप्रकाशित रचना-

Related Posts

मंगल हो नववर्ष| navvarsh par kavita

December 30, 2022

मंगल हो नववर्ष मिटे सभी की दूरियाँ, रहे न अब तकरार। नया साल जोड़े रहे, सभी दिलों के तार।। बाँट

तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ| Tumse ab mai kya chupaun

December 30, 2022

 तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ तुमसे अब मैं क्या छुपाऊँ , सोचता हूँ यह भी मैं। किस्सा खत्म ही यह

मनोविकार | manovikar

December 29, 2022

 मनोविकार उठता जब शत्रु मनोविकार फ़ैल भयंकर दावानल-सा।  काम, क्रोध, लोभ, मोह से संचित पुण्यों को झुलसा। मन से उपजा

ईश्वर का उपहार है जीवन| ishwar ka uphar hai Jeevan

December 29, 2022

ईश्वर का उपहार है जीवन ईश्वर का उपहार है जीवन। ऐसे कर्म जीवन में करें।। याद करें हमको जमाना। ऐसे

एक तू ही है जिसको | ek tu hai jisko

December 28, 2022

 एक तू ही है जिसको एक तू ही है जिसको—————-।वरना हो गई मुझे तो नफरत,इन चमकते शीशों से,गोरे इन चेहरों

नये पलों की तलाश करो | naye palon ki talash karo

December 26, 2022

नये पलों की तलाश करो नये साल की नयी बेला परकुछ प्यारा सा नया काम करो नये साल की नयी

PreviousNext

Leave a Comment