kavita-haiwaniyat by antima singh
कविता-हैवानियत कमजोर जानकर किसी को क्युं सताते हैं लोग, मासूम दिलों पे पत्थरों की बौछार क्युं चलाते हैं लोग, कभी …
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आज निकल गया हम कल को संवारने में लगे कि, आज फिसल गया।हम बुन रहे थे भविष्य को कि,आज निकल
kavita anpadh beti by mosam khan alwar
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नमस्कार साथियों मै मौसम खान मेवात अलवर राजस्थान से हूं मेरी ये कविता में मेवाती में लिख रहा हु जिसमे
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छीजता विमर्श. दुखद- शर्मनाक जीवन पथ पर निरपेक्षता नामित शस्त्र से वर्तमान के अतार्किक भय में रिस रहा लहू इतिहास
kavita tahreer me pita by mahesh kumar .
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कविता.. तहरीर में पिता.. ये कैसे लोग हैं ..?? जो एक दूधमुंही नवजात बच्ची के मौत को नाटक कह रहें हैं…!!
