Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita – Gyani abhimani mosam khan alwar

      अज्ञानी अभिमानी सबसे  अच्छा है तू इंसान , सबसे ज्यादा  है तेरा सम्मान,, पल भर की ये तेरी …


      अज्ञानी अभिमानी

kavita - Gyani abhimani mosam khan alwar


सबसे  अच्छा है तू इंसान ,
सबसे ज्यादा  है तेरा सम्मान,,
पल भर की ये तेरी जिंदगी, 
अज्ञानी  कितना है अभिमान।।
 तू संस्कार से संस्कारित है
 मानवता को लिए  धारित है,
 सबकुछ मांगा है जिंदगी का
  फिर अज्ञानी कियू हर्षित है।।
     
तुझको जीवन दिया है रब ने,
प्रकृति में तुझे  माना सबने ,
ए नादान मुसाफिर ,सुनले ,
अज्ञानी कितना है अभिमान।।
तेरी राह थी आसान,
हक हलाल की कर पहचान,
छोड़ बेईमानी कर इंसाफ,
अज्ञानी  कर रब की पहचान,
      
एक दिन टूटेगा अरमान,
सूना रहेगा तेरा मकान,
छोड़ देंगे दो कदम साथ चल के
अज्ञानी फिर टूटेगा अभिमान,
अब तू जिंदगी से जागेगा,
 काल कोठरी से कहा भागेगा,
 कर सामना अपने कर्मो का,
 हैं अज्ञानी तेरा कहा गया अभिमान
 है इंसान तू है कितना नादान,,
                                         स्वरचित मौसम खान
                                          अलवर  (राजस्थान)


Related Posts

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

January 25, 2022

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी

राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के

Leave a Comment