Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Kuldeep Singh, poem

Kavita: eknishthta |कविता :एकनिष्ठता

कविता: एकनिष्ठता नदी का एक पड़ाव होता हैवो बहती है समंदर की तलाश मेंबादल भी चलते हैं, बहते हैं मौसम …


कविता: एकनिष्ठता

Kavita: eknishthta |कविता :एकनिष्ठता

नदी का एक पड़ाव होता है
वो बहती है समंदर की तलाश में
बादल भी चलते हैं, बहते हैं
मौसम और जलवायु के अनुरूप
नहीं होता है बादलों का कोई पड़ाव
ना ही होता है कोई प्राप्ति-लक्ष्य
देखकर अवसरवादिता
और पाकर अनुकूलता
बरस पड़ते हैं जहां-तहां

समाज में स्त्री वर्ग प्रतीक है इन नदियों का
और पुरुष इन आवारा बादलों का

सच…!!
समाज में
स्त्रियां जितनी एकनिष्ठ हो पाई हैं
उतनी एकनिष्ठता और समर्पण का
सदैव अभाव रहा है पुरुषों में ।

About author 

कुलदीप सिंह भाटी
कालूराम जी की बावडी,
सूरसागर, जोधपुर


Related Posts

गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा

December 17, 2022

 गणतंत्र दिवस पर कविता –तिरंगा तिरंगा है हमारी जान, कहलाता देश की शान। तीन रंगों से बना तिरंगा, बढ़ता हम

Saraswati vandana basant panchami special

December 17, 2022

सरस्वती वंदना बसंत पंचमी विशेष हे विद्यादायिनी ! हे हंसवाहिनी ! करो अपनी कृपा अपरम्पार।हे ज्ञानदायिनी ! हे वीणावादिनी !बुद्धि

Maa-ki-mamta-par-kavita

December 17, 2022

कविता-मां की ममता मां की ममता मिलती हैं सबको कोई अच्छूता नहींकद्र करने की बात है कोई करता कोई नहीं

Pita ke pyar par kavita

December 17, 2022

कविता-पिता का प्यार अनमोल है पिता का प्यार अनमोल है पर वह कभी जताते नहीं बच्चों के लिए सब कुछ

Tumse hai hausala

December 17, 2022

 तुमसे है हौंसला  ढलती हुई किसी शाम मेंमेरे कांधे पर अपना सर रखेबैठी हो तुम जब,तुम्हारी पलकें आंसुओं से भीगी

योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई

December 17, 2022

व्यंग्य कविता–योजनाओं का लाभ लिए दिए पर मिलता है भाई सुशासन समागम में सीएम ने यह बात बिना हिचक के

PreviousNext

Leave a Comment