Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita corona me pas by mosam khan

 साथियों हमारी मेवाती भाषा में मेने  चार लाइनें जोड़ने की कोशिश की है उम्मीद करता हु आपको पसंद आएंगी  हौसलाफ़जई  …


 साथियों हमारी मेवाती भाषा में मेने  चार लाइनें जोड़ने की कोशिश की है उम्मीद करता हु आपको पसंद आएंगी  हौसलाफ़जई  के लिए प्लीज लाईक और कॉमेंट करे

                         शीर्षक 
                  कोरोना में पास

kavita corona me pas by mosam khan

दो साल सु चली बीमारी कोरोना जाको नाम,,
जन जीवन याने बिगाड़ दियो , करदीयो काम तमाम।।
देश बर्बाद होगो,
 कोरोना तेरो नाम होगा।।
सबसू पहले स्कूल हुआ बंद, हुयो बालक में बिगाड़।।
पढ़ाई लिखाई उनने सब छोड़ी,होगा सारा फेल जुगाड।।
ऑनलाइन जुगाड चलयो,
बालक घर ना पढ़ पायो।।
मां बाप सु डरे नहीं बालक,ना गुरूजी को खौफ,,
वैयात ऊ दिन्नू डोले,लगो पबजी को शौक,
सारा दिन गेम खेले,
किताब खोल ना देखे।।
पिछली साल ऊ पास होगा , वाय है अब के भी आस
यही हाल रहो कोरोना को तो होतो रहेगो पास,
किताब पढ़ कर ना देखे,
किताब को नाम ना जाने,,
रात अचानक खबर सूनी ही, हुयो ना विशवास,
बिना पेपर दिया बालक,होगा सारा पास ।।
देश को कहा होगा
कोरोना तेरो नाम होगा,,
खूब कराई हमने मेहनत,आज बात समझ नही आए,,
अखबार की खबर पढ़ कर बालक,फूलो ना समाय,,
ओ में बीन पेपर पास होगा,
कोरोनो को एहसान होगा।।
याको एक फिकर मास्टर है,वाकी सुने ना कोए,
यही हाल रहो हमारो,नुकसान भविष्य को होए,
अरे ओ सुनयो भाई,
पास की किया रीत चलाई।।
                 🪴 स्वरचित  मौसम खान🪴
                    अलवर राजस्थान

Related Posts

अनंत यात्रा

June 24, 2022

 अनंत यात्रा सुधीर श्रीवास्तव शून्य से शिखर तक जीवन की गतिमान यात्रा खुद को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होने का दंभ

कदम

June 24, 2022

 कदम सुधीर श्रीवास्तव हमें लगता है कि हमारे कदम किसी और को  प्रभावित नहीं करते , पर सच तो यह

व्यंग्य स्वार्थ के घोड़े

June 24, 2022

 व्यंग्यस्वार्थ के घोड़े सुधीर श्रीवास्तव आजकल का यही जमाना अंधे को दर्पण दिखलाना, बेंच देते गंजे को कंघा देखो! कैसा

डरने लगा हूँ मैं

June 24, 2022

 डरने लगा हूँ मैं सुधीर श्रीवास्तव वो छोटा होकर  कितना बड़ा हो गया है, बड़ा होकर भी बहुत छोटा हो

परिस्थितियां

June 24, 2022

 परिस्थितियां सुधीर श्रीवास्तव जीवन है तो परिस्थितियों से दो चार होना ही पड़ता है, अनुकूल हो या प्रतिकूल हमें सहना

मजदूरों का मान

June 24, 2022

 मजदूरों का मान सुधीर श्रीवास्तव माना कि हम मजदूर हैं पर मेहनत से जी नहीं चुराते, अपने काम में समर्पित

PreviousNext

Leave a Comment