Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav

 भावनाएँ बारिश की ****************ये भी अजीब सी पहली हैकि बारिश की भावनाओं को तोपढ़ लेना बहुत मुश्किल नहींसमझ में भी …


 भावनाएँ बारिश की

kavita bhavnayen barish ki by sudheer shrivastav


****************
ये भी अजीब सी पहली है
कि बारिश की भावनाओं को तो
पढ़ लेना बहुत मुश्किल नहीं
समझ में भी आ जाता है
पढ़कर समझ में भी आता है।
परंतु भावनाओं की बारिश
कब, कहाँ कैसे और
कितनी हो जाय ,
कोई अनुमान ही नहीं।
हमारी ही भावनाएं
कब, कहाँ, कैसे और कितनी
कम या ज्यादा बरस जायेंगी
हमें खुद ही अहसास तक नहीं।
भावनाओं की बारिश के
रंग ढ़ग भी निराले हैं,
अपने, पराये हों या दोस्त दुश्मन
जाने पहचाने हों या अंजाने, अनदेखे
जल, जंगल, जमीन, प्रकृति,
पहाड़, पठार या रेगिस्तान
धरती, आकाश या हो ब्रहांड
पेड़ पौधे, पशु पक्षी ,कीट पतंगे,
झील, झरने,तालाब ,नदी नाले
या फैला हुआ विशाल समुद्र,
सबकी अपनी अपनी भावनाएं हैं
और सबके भावनाओं की
होती है बारिश भी।
इंसानी भावनाएं होती सबसे जुदा,
इन्हें और इनकी भावनाओं को
न पढ़ सका इंसान तो क्या
शायद खुदा भी।
भावनाएं और उसकी बारिश की
लीला है ही बड़ी अजीब सी।
● सुधीर श्रीवास्तव
      गोण्डा, उ.प्र.
©मौलिक, स्वरचित

,


Related Posts

कोशिश- अनीता शर्मा

November 23, 2021

 “कोशिश” कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। हिम्मत से आगे बढ़ कर प्रयत्न करते जाना है। मन में

आहत – सुधीर श्रीवास्तव

November 23, 2021

 आहत  कितना आसान है  किसी को आहत करना, जले पर नमक छिड़कना । पर जरा सोचिए कोई आपको यूँ आहत

जीवन रूपी चाय-डॉ. माध्वी बोरसे!

November 23, 2021

जीवन रूपी चाय! बचपन हमारा, सफेद दूध जैसा, जिंदगी ने लगाया, उबाल यह कैसा, कोई ना, जिंदगी को एक स्वादिष्ट

उड़ गई तितली- देवन्ती देवी चंद्रवंशी

November 22, 2021

 उड़ गई तितली कैसे कहूॅ॑ सखी कुछ कही न जाए मन हुई तितली देखो उड़ती जाए कैसे रोकूॅ॑ मेरी बावरी

खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना-जयश्री बिर्मी

November 22, 2021

 खाया पिया कुछ नहीं ग्लास तोड़ा बारह आना किसान कानून की वापसी कही गढ़ आला पन सिंह गेला न बन

किस्से मोहब्बत के-तेज देवांगन

November 22, 2021

 किस्से मोहब्बत के किस्से मोहब्बत के किसको सुनाएं, सब यहां कहानीकार बने है। लिख दूं गजल मैं, गर किताबों पे,

Leave a Comment