Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita balatkar written by rajesh

बलात्कार ज्येठ महीने की थी बात , भीषण गर्मी की थी रात।स्कूल हमारे बंद हुए थे,थक के हम भी चूर …


बलात्कार

kavita balatkar written by rajesh

ज्येठ महीने की थी बात ,
भीषण गर्मी की थी रात।
स्कूल हमारे बंद हुए थे,
थक के हम भी चूर हुए थे।
मानव रूपी भेड़िया आया,
उस वहसी को तरस ना आया।
मैं छोटी बच्ची लाचारी थी,
घर की प्यारी दुलारी थी।
उस अंधेरी रात मैं चीखी थी,
मांँ बापू कहकर बिलखी थी।
उस भेड़ियों को तरस ना आया,
मैं बच्ची पर तरस ना आया।
मैं एक बच्ची दलित लाचारी,
लोगों के लिए अछूत थी।
मैं उस अंधेरी रात रोई
बिलखी चिखी थी।
उस मानव रूपी भेड़िए ने,
उस रात कहंर बरपाया था।
मांँ मांँ कहते कहते,
उस रात मुझे तड़पाया था।
उस काली अंधेरी रात में ,
मेरे कोमल से जिस्म में।
दानव जैसे दांत गडाया था।
उसे ज्येठ की रात मुझे,
मानवता पे सरम आया था ।
उस अंधेरी रात को चिखते हुए,
हाय माँ हाय पा कहके ,
मैने कैसे रात बिताया था।
मै भी तुम्हारी बहन बेटी हूँ,
कुछ तो मुझपे तरस करो।
मैं एक दलित बेटी हूँ,
कुछ तो खुद पे शर्म करो।
दलित होने पे तुम अछूत मानते,
बलात्कार करते कुछ नही मानते।
ये कैसे इंसान हो तुम ,
इंसान हो या हैवान हो तुम।

राजेश “बनारसीबाबू”
वाराणसी(उ.प्र.)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित रचना

www.indufix.com.br


Related Posts

जिंदगी तो है बहता झरना/zindagi to hai bahta jharna

August 2, 2022

जिंदगी तो है बहता झरना कितनी सारी जिंदगियाँ मिलती है रोजानाहर जिंदगी जैसे है किताब का एक पन्नापर कहाँ मुनासिब

पापा हमारे लिए हैं भगवान

July 31, 2022

 पापा हमारे लिए हैं भगवान |papa hamare liye bhagwan hai हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान उनकी पनाह में रहना

अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते

July 22, 2022

 अगर आप ईश्वर से थोड़ा डरते होते  न करनी पड़े फरियाद हमें  अगर आप ऐसे होते  न करनी पड़े नफ़रत

किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम!

July 22, 2022

 किसी की सफलता को ना दो निर्भरता का नाम! सफलता किसी के दम पर जीती नहीं जाती, पर कुछ लोगों

सहमा-सहमा आज| sahma sahma aaji

July 20, 2022

 सहमा-सहमा आज कौन पूछता योग्यता, तिकड़म है आधार । कौवे मोती चुन रहे, हंस हुये बेकार ।। परिवर्तन के दौर

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे | manmeet re karni hai tujh sang Preet re

July 15, 2022

 मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  जाने है हम तू

PreviousNext

Leave a Comment