Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

kavita aurat paida hoti hai | aurat par kavita

औरत पैदा होती है बनाई नहीं जाती सूत दो सूत का अंतर रहा होगा दोनों बच्चों मेंडील डौल कपड़े लत्ते …


औरत पैदा होती है बनाई नहीं जाती

kavita aurat paida hoti hai | aurat par kavita

सूत दो सूत का अंतर रहा होगा
दोनों बच्चों में
डील डौल कपड़े लत्ते सब एक जैसे

हरसिंगार के नीचे पहुंच
उनमें से एक गिरे फूल बीनने लगा
दूसरा साइकिल सीखता रहा
गिरा
तो दूसरे ने दौड़ कर उसे फूल की तरह उठाया

अपने लड़का लड़की होने से अनजान
दोनों एक जैसे दिख रहे थे
पर थे नहीं

लड़की फूल बीन रही थी
लड़का साइकिल चला रहा था

बच्ची जब कद निकालने लगी
उसे लड़की के कपड़े पहनाए जाने लगे
क्योंकि वह लड़की थी

लड़के ने शौक़ में भी कभी
लड़कियों के कपड़े नहीं पहने

लड़की को अपने आप पता चल गया
कि वह लड़का नहीं है
उसे अपना लड़की होना पसंद था

लड़की नहीं जानती थी
कि औरत पैदा नहीं होती , बनाई जाती है
बिना जाने बनाए वह औरत बनती गयी
क्यों कि वह लड़की थी
अपने लड़की होने को चोरी चोरी आइने में निहारती
मां की तरह दिखना चाहती रही

जब भी उसे तरजीह दी जाती
उसे अच्छा नहीं लगता
वह अपना हिस्सा भाई को दे देती

नक्शा नवीश ने उसकी पीठ पर
खिड़की का प्राविधान रखा था
खिड़की कालांतर में खोली गयी

खिड़की खुली पर ढंकी रहे
इसलिए उस पर पर्दे डाले गए

पर्दे सिले गए
क्योंकि खिड़की थी

लड़की को बात बात पर हंसना
और आंख की कोर से देखना स्वतः आया
लड़का जिम जाने के बावज़ूद
अपनी पीठ पर आंखें न उगा पाया

धूप हवा पानी धरती आकाश सब एक थे
पर वे दो थे
जैसे आम और बेल

लड़के की गर्भ धारण इच्छा
कभी पूरी न हो सकी
लड़की ताउम्र अपनी ममता का शिकार होकर भी
ममत्व का आनन्द लेती रही

स्त्री कभी कठोर नहीं हो पाई
पुरुष की नमीं कठोरता में सुरक्षित होती गयी
नारियल के भीतर पानी पैदा होता है
सूई से नहीं डाला जाता

ताप और उत्ताप की सामूहिक सृष्टि की तरह
विकसित हुए दोनों
ममता की चाशनी और पौरुष का नमक

स्त्री को थोड़ी कम स्त्री बना कर देख लो
पुरुष में उगा सको तो एक स्त्री उगा लो
सफलता मिले तो वाह वाह
नहीं तो दोनों जैसे हैं
वैसे भी मिल कर दुनिया बदल सकते हैं

– देवेन्द्र आर्य
गोरखपुर

Related Posts

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

छोड़ दिए गये हैं मर जाने के लिए बहुत वक्त और संसाधन लग जातेकिसी देश के…इस कोरोना नामक महामारी कोपूरी

तोड़ा क्यों जाए?- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

तोड़ा क्यों जाए? गुलाब!तुम सलामत रहनाअपनी पत्तियों, टहनियों, जड़ों,परिवेश और वजूद के साथ,तुम्हारी महक और खूबसूरतीका इस्तेमाल नहीं करना है

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

विरोध के स्वप्न और इंसानी कायरता आज मेरे स्वप्न में..पेड़ों ने हड़ताल कीपरिंदों के आज़ादी सेआकाश में उड़ने परलगे प्रतिबंधों

मां शारदे वंदना- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

ओ शारदे मां ज्ञान ओ शारदे मां ज्ञान की गंगा बहा दे मांमैं हूं अज्ञानी नेह कीकृपा बरसाओ नातू ही

खुशियां दिखावे की- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

खुशियां दिखावे की ना तुम खुश हो ना हम खुश हैं यह खुशियां है दिखावे की यह जमाना है बड़े

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

February 14, 2022

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों

Leave a Comment